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Sunday, 22 April 2018

क्या वीडियोज दिमाग पर असर ड़ालते हैं ?

आजकल व्हाट्सएप्प का ट्रेंड बड़े जोरों पर है. आपने देखा होगा व्हाट्सएप्प पर रोज ही कोई न कोई नया वीडियो ट्रेंड करता है. वैसे भी आजकल प्रैंक्स का जमाना है. प्रैंक्स के माध्यम से तो कुछ लोग पैसे भी कमा रहे हैं. व्हाट्सएप्प पर आने वाले कुछ वीडियोज़ तो ऐसे होते हैं जो देखने में बहुत अच्छे लगते हैं और जिन्हें देखकर मन प्रशन्न हो जाता है. कई बार तो वीडियो देखने के बाद उनके बारे में सोचकर भी हंसी आने लगती है और इंसान अकेला बैठा बैठा हंसने लगता है. मुझे इस मामले में व्हाट्सएप्प काफी पसंद आया.  

पर जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही व्हाट्सएप्प का एक दूसरा पहलू भी है. दूसरे पहलू को हम नकारात्मक पहलू भी कह सकते हैं. आजकल व्हाट्सएप्प पर ब्लू फिल्में, एडल्ट वीडिओज़, अश्लील जोक्स, गंदे एमएमएस तथा हिंसा के बहुत सारे वीडियो भी शेयर किये जा रहे हैं. बहुत से वीडियो तो फ़र्ज़ी होते हैं पर अधिकांश ऐसे भी होते हैं जो वास्तविक होते हैं. इनमे से कुछ वीडियो लाइव एक्सीडेंट, लाइव मर्डर, रेप, छेड़छाड़, सेक्स सीन, मारपीट आदि के भी होते हैं. यही व्हाट्सएप्प का वो पहलू है, जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं. यही वीडियो हमारे समाज में विकृति उत्पन्न करते हैं. 

वैसे भी आजके समय में इंटरनेट लगभग मुफ्त में उपलब्ध है. सरकार भी प्रमुख स्थानों पर मुफ्त वाईफाई सेवा उपलब्ध करा रही है. रही बची कसर रिलायंस जिओ ने आकर पूरी कर दी. मोबाइल कंपनियां भी एक से एक सस्ते 4G मोबाइल लांच कर रही हैं. कुछ कंपनियां तो किस्तों पर भी मोबाइल उपलब्ध करा रही हैं. आजकल अमीर से लेकर गरीब, लगभग हर व्यक्ति के पास स्मार्ट फोन मौजूद है. वास्तव में घर से दूर रहने वाले लोगों के लिए ये टाइम काटने का एक अच्छा माध्यम भी है. आजकल तो बड़े घर के बच्चों के पास भी अपने मोबाइल होता है. माँ बाप भी सोचते हैं कि उनका बच्चा अपने स्कूल के प्रोजेक्ट आदि के लिए इसका  प्रयोग कर रहा है. पर बच्चा असल में देख रहा होता है, व्हाट्सएप्प/इंटरनेट पर आने वाले वे विडिओज़. 

अब बात करता हूँ असल मुद्दे की. आजकल दूर दराज के गरीब मजदूर काम की तलाश में बड़े शहरों में रहने चले जाते हैं. दिल्ली जैसे बड़े शहरों में तो आसपास के कई राज्यों से लोग काम करने आते हैं. ऐसे लोग जब दिन भर काम करके थक जाते हैं, तो रात को उनका मोबाइल ही मनोरंजन का एक प्रमुख साधन होता है. मोबाइल पर ही ये लोग यूट्यूब के माध्यम से फ़िल्मी गाने व अन्य मनोरंजक वीडिओज़ देख लेते हैं. इंटरनेट पर कुछ ऐसी वेबसाइटें भी होती हैं जो पोर्न सामग्री उपलब्ध कराती हैं. घर से दूर, दूसरे शहरों में  रहने वाले अधिकतर लोग मनोरंजन के रूप में इन्ही साइटों को देखते हैं. बाकी जो कमी रहती है वो व्हाट्सएप्प पूरी कर देता है.

अब जरा अंदाजा लगाइये कि ऐसी वीडिओज़ घर से दूर रहने वाले व्यक्ति के दिमाग पर कैसा असर डालती होंगी? हम जब सिनेमा हाल से कोई फिल्म देखकर निकलते हैं, तो दो-चार घंटे उसके सीन दिमाग में घूमते रहते हैं. बिलकुल वैसा ही उन लोगों के साथ भी होता है. रोज अश्लील फ़िल्में, क्लिप्स, मारपीट, मर्डर, रेप, छेड़छाड़ के वीडिओज़ देखने के बाद उनके दिमाग में भी वही सीन घूमते रहते होंगे. इनमें सेक्स वीडिओज़  इंसान के दिमाग पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं. ऐसे वीडियोज देखने के बाद व्यक्ति में सेक्स की इच्छा जाग्रत होने लगती है. जब उनकी सेक्स इच्छा पूर्ति नहीं हो पाती है, तो ये मानसिक कुंठा तथा अवसाद के शिकार हो जाते हैं. अपनी इच्छा पूर्ति के लिए ये लोग अपने आसपास रहने वाली कमजोर लड़कियों और महिलाओं को शिकार बनाते हैं. कई बार लड़कियां अथवा महिलाएं न मिल पाने पर ये छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं. देश में बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं का एक एक प्रमुख कारण ये भी है. पिछले दिनों देश में जब एक के बाद एक कई मासूम बच्चों के साथ ऐसी ही दरिंदगी की घटनायें हुईं तो भारत सरकार को मजबूरन पास्को एक्ट में संसोधन करना पड़ा.
देश में जब भी किसी मासूम के साथ बलात्कार की घटना होती है, तो पूरा देश उसका पुरजोर विरोध करता है. इस विरोध में बॉलीवुड के सितारे भी शामिल हो जाते हैं. पर कहीं न कहीं उस घटना के पीछे थोड़ा सा रोल उनका भी होता है. उन्हीं फ़िल्मी सितारों की अश्लील फिल्में देखकर ऐसे कुछ लोग मानसिक कुंठा के शिकार होते हैं, और अपनी हबस पूरी करने के लिए उन्हें जब कोई नहीं मिलता तो ये मासूम बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं.

इसीलिए मेरा ये व्यक्तिगत विचार है कि इसके लिए बनाया गया क़ानून इसे रोकने में बहुत कारगर साबित नहीं होगा। संभव है उस कानून का दुरुपयोग भो हो. कानून बनाने से अच्छा होता सरकार बलात्कार की घटनाओं के कारण जानने की कोशिश करती और उनको दूर करने का प्रयास करती. यदि इंटरनेट और व्हाट्सएप्प के माध्यम से ट्रांसफर होने वाले अश्लील और हिंसा वाले वीडिओज़ रोक दिये जाएँ, फिल्मों में दिखाए जाने वाले सेक्स सीन सेंसर द्वारा पास ही न किये जाएँ और सावधान इंडिया व क्राइम रिपोर्टर जैसे धारावाहिकों को बैन कर दिया जाये तो संभवतः ऐसी घटनाओं को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.

Friday, 20 April 2018

ट्रेन में नही आती..

बात बहुत पुरानी है. तब मै B.Sc.फाइनल इयर मे था. मेरी माता जी की तबियत उस समय कुछ खराब चल रही थी. डाक्टर से तारीख मिल गई थी, इसीलिए मुझे तत्काल मम्मी को लेकर लखनऊ जाना था. ये जनवरी की कडकडाती ठंड का मौसम था, और उस दिन कुछ ठंड भी ज्यादा थी. हमे रात वाली पैसेंजर ट्रेन से लखनऊ जाना था. अधिकांश ट्रेन खाली थी. हम लोग दरबाजे के पास वाली सीट पर बैठ गये. हमारे आस पास 4-5 लोग और बैठे हुए थे. ठंड की बजह से सभी ने सर तक साल ओढ रखी थी. मेरे सामने वाली सीट पर एक बिहारी ठंड से कंपकपाता हुआ बैठा था. रास्ते में संड़ीला स्टेशन पर ट्रेन काफी देर रूकी. मेरे सामने बैठा बिहारी वहाँ उतर गया. जब ट्रेन चलने लगी तभी मेरे पास बैठे व्यक्ति ने दरबाजा अन्दर से बन्द कर लिया, ताकि ठंडी हवा अन्दर न आ सके. 

कुछ समय बाद मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने बाहर से दरबाजा खटखटाया. मैने पास वाले व्यक्ति से कहा कि शायद किसी ने दरबाजा खटखटाया. उसने कहा, ट्रेन काफी तेज चल रही है, इसीलि हवा से दरबाजा खटक रहा है. मैं शांत बैठ गया की शायद यही कारण होगा। मुझे 2-3 बार और दरबाजा खटकने की आवाज आई पर मैं शांत बैठा रहा. कुछ देर बाद वो खटखटाने की आवाज भी आनी बन्द हो गई. पर पता नही क्यों मेरा मन नही मान रहा था. लगातार ये लग रहा था कि शायद कोई तो था। आख़िरकार मन नहीं माना और मैंने उठकर दरबाजा खोल दिया. सामने का दृश्य देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गयीं. मैंने देखा कि सामने वही बिहारी व्यक्ति अकडा हुआ व गिरने की कगार पर खडा था. मैने जैसे तैसे उसे अन्दर खींचा और वह धडाम से अन्दर गिर पड़ा. काफी देर बाद जब उसमे जान आई तो उसने मेरे पैर पकडकर कहा कि अगर 5 मिनट और आप नही आते तो मेरे हाथ छूट जाते. 

अगले स्टेशन पर मैने उसे चाय पिलाई और पूँछा कि तुम उतरे क्यों थे ? वह बोला, "मुझे ट्रेन मे पेशाब नही आती, इसलिए नीचे उतर गया था". उसकी बात सुनकर वहाँ बैठे सभी लोग हँस पड़े. आज पता नही वह कहाँ होगा, पर ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह जहाँ भी रहे पर दोबारा ऐसी गलती न करे.